Sunday, 9 March 2008

मेरी हालकी मुम्बई यात्रा -१

वैसे लोगो के लिये यह बडी बात नहीं होती है । मुम्बई तो क्या आज तो कई लोगो के लिये विदेष यात्रा भी अचरज की बात नहीं होती है । पर मेरा घूमना कम रहा है, और कुछ: सालों से मेरा यह सिलसिला बन गया है, कि गरमी का मौसम शुरू होने से पहेले साल या दो साल के बाद मुम्बई करीब एक हप्ते के या दस दिन के लिये घूम आऊँ, और मेरे भी बुझूर्ग सम्बंधीयों तथा अन्य सम्बंधीयोँ , मेरे अफसर रह चूके देना बेन्क के कुछ: मित्रो, जो मुम्बई से सुरत कभी तबादले के तौर पर आये थे , उनको, विविध भारती के साथियों, तथा कुछ: फिल्म-संगीत से जूडे वादक कलाकारों तथा आवाझ की दूनिया से जूडे स्वायत प्रसारको से जो मूझे कुछ: जानते और पहचानते है उनको दोनो और के समय संयोग अनुसार मिलकर सुरत लौटूँ ।
इस सिलसिले के अनुसार सुरत से पहेला सम्पर्क मैंने श्री अमीन सायानी साहब का सुरत से ही किया तो वे तो बहोत खुश: हुए और उन्होंने मूझे मंगलवार दि. २६- ०२-०८ के दिन दोपहर १२.३० पर अपने साथ शुद्ध वेजिटेरियन लंच लेने के लिये आमंत्रीत किया और अपनी डायरीमें मेरा नाम उस समय के लिये पक्का कर लिया ।
बादमें मुम्बई जाने के दूसरे दिन हमारे इस ब्लोग के साथी और वित्त पत्रकारिता में विषेष रूची रख ने वाले श्री कमल शर्मा जी मूझे मिलने आये और बहोत सारी जानकारी से भरी बात से मूझे आनंदित कर गये और प्रतिकात्मक पर सुंदर भेट से नवाज कर गये, जिसका थोडा बयान मैनें उसी दिन मुम्वई से ही दिया था ।
दि. २३ के रविवार के दिन मैं अपने ठहराव से सुबह का लंच ले कर (शायद सुबह और लंच शब्दो का मेल दुनिया की नझरमें ठीक नहीं है , पर सुरत में मेरी आदत सुबह के नास्ते की नहीं पर पूरे खाने की रही है, जैसे स्कूल के दिनों लोगो की होती है । और दो पहर हलके नास्ते की रही है । इस के लिये थोडे स्वास्थ्य के कारण भी है ।) निकला और महालक्ष्मी स्टेशन जा कर श्री गोपाल शर्माजी के घर जाने के लिये बोरिवली ट्रेईन पकडी जो प्लेटफोर्म के गलत इन्डिकेटर के हिसाब से थी और अंध्रेरी तक की ही थी । और उस दिन मेगा ब्लोक (यूनुसजी, अनिताजी और कमलजी इस बात से भली भांती परिचीत ही होंगे ।) और इन्डिकेटर्स की लिखावट कई और आने वाली ट्रेईन्स का कोई मेल न होने के कारण अन्धेरी स्टेशन से चल कर वेस्टन एक्स्प्रेस हाई- वे गया जहाँ से उसी हाई वे पर बोरिबली में श्री गोपाल शर्माजी रहते है , मैं बस पकड कर गया । शारीरीक और मानसिक रूपसे जो थकान महेसूस हुई थी, वह श्री गोपाल शर्माजी से मिल कर उतरने लगी । उन्होंने भी मेरे फोन से बताने के आधार पर श्री अमीन सायानी साहब से मेरे आने के पहेले मेरे बारेमें बात की थी, तो मेरे पास फिर से फोन करवा के बात करवाई । बाद में पूरानी रेडियो और विग्यापन के बारेमें बात की तव मेरे मूह से एक बात श्रीमती तबस्सूमजी के माताजी और पिताजी के आन्तर धर्मीय प्रेम विवाह के बारेमें, वह कैसे हुआ था उस घटना की बात निकल पडी, जो शर्माजी को तबस्सूमजी के साथ ११ साल विविध भारती से पारले प्रोडक्ट द्वारा प्रयोजित कार्यक्रम तूम जियो हजारो साल करने पर और म्यूझिक इन्डिया लि. द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम के कुछ: किस्तों के करने पर भी पता नहीं थी । तब उन्होंने तबस्सूमजी से फोन करके मेरा परि चय करवाया । और तबस्सूमजीने भी बहोत अच्छी तरह बात की ।
च्चबात मैनें उनको कही, जो उनको १९८५में दूर दर्शन पर अस्थायी समाचार पाठक के रूपमें देख़ कर मेहसूस की थी, वह बताई की वे भाषा और उच्चार शुद्धि तो रखते हुए भी बहोत लो प्रोफाईल अपने आपको रखते लगते है । तो शर्माजीने ज्नसे भी दूरभाषी परिचय करवाया । अब अगला विवरण अगली पोस्टमें जो बहोत जल्ग आयेगी ।

2 comments:

मीडियागुरु said...

Piyush Ji,
Thanks for uploading your video interview with Ameen Sayaani on esnipes. But the changed scenario at esnips does not allow viewing or downloading what you have posted. I suggest you make DVD copies of the entire interview. Radionama group members would love to buy the same. RDBurman fan group in Kolkata that hold annual musical evening in memory of late composer do the same by offering DVDs of the programme at Rs.350 to group members. Can we do this?
Its just a stray thought.
Regards.
Rajendra

अल्पना वर्मा said...

thanks for sharing